क्या यह बना रहेगा?

हम कैसे जानें कि परमेश्वर के साथ हमारा सम्बन्ध सुरक्षित है।

हमारे जीवन में ऐसे बहुत से सम्बन्ध हैं जो बने नहीं रहते हैं। हम तलाक या हो सकता है कि किसी प्रिय की मृत्यु को देख सकते हैं, मित्रों को खो सकते हैं। इसलिए, हो सकता है कि आप परमेश्वर के साथ इस नए सम्बन्ध को लेकर आश्चर्य में हों...कि क्या यह बना रहेगा?

परमेश्वर हम से कहता है, "मैं तुझे कभी न छोडूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।" (इब्रानियों 13:5)। जब हम हमारे जीवन में परमेश्वर को चाहते हुए, यीशु में विश्वास रखते हैं, तो हम उसकी सन्तान बन जाते हैं तथा सदैव के लिए उसके प्रेम में सुरक्षा को प्राप्त कर सकते हैं। पवित्रशास्त्र के निम्न वचन आपको यह देखने में सहायता प्रदान करेंगे कि परमेश्वर सम्बन्ध के साथ आपके सम्बन्ध में अब क्या सत्य है।

हमने परमेश्वर के साथ सम्बन्ध को कमाया नहीं है, न ही हमें इसे थामे रहने में संघर्षरत् रहना है। बाइबल इसके बारे में स्पष्ट है। जब एक बार हम हमारे विश्वास को यीशु मसीह में कर लेते हैं, तो हमें परमेश्वर के द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है।

अर्थात् परमेश्वर की वह धार्मिकता [उसके साथ बिल्कुल ठीक होना] जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करनेवालों के लिये है। क्योंकि कुछ भेद नहीं;इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु [क्रसू के ऊपर] में है, सेंत-मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। (रोमियों 3:22-24)

पवित्रशास्त्र के निम्न वचन आपको यह देखने में सहायता प्रदान करेंगे कि परमेश्वर के साथ आपके सम्बन्ध में अब क्या सत्य है।

मसीही विश्वासी बनने से पहले

आप निम्न बातों के प्रति जागरूक न हों। परन्तु फिर भी, मसीही विश्वासी बनने से पहले, बाइबल हमारे लिए इस तरह का विवरण देती है:

  • परमेश्वर के शत्रु (रोमियों 5:10)
  • निर्बल (रोमियों 5:6)
  • भक्तिहीन (रोमियों 5:6)
  • पापी (रोमियों 5:8)
  • खोए हुए (मत्ती 18:11)
  • कंगाल (प्रकाशितवाक्य 3:17)
  • अन्धे (2 कुरिन्थियों 4:4)
  • परमेश्वर के क्रोध के अधीन (यूहन्ना 3:36)
  • पापों के कारण मरे हुए (इफिसियों 2:1)
  • मूर्ख, लालसाओं के दासत्व में (तीतुस 3:3)
  • बुरे कामों को करने वाले (कुलुस्सियों 1:21)
  • परमेश्वर से दूर (इफिसियों 2:13)
  • आशाहीन (इफिसियों 2:12)
  • अन्धकार में चलने वाले (यूहन्ना 8:12)

अब क्योंकि हम मसीही विश्वासी हैं

जिस क्षण से हमने मसीह को अपने जीवन में स्वीकार किया है, हमें एक नया जीवन मिल गया और हमारा परमेश्वर के साथ सम्बन्ध बन गया है। यहाँ पर बाइबल हमें अब वर्णन करती है कि क्योंकि मसीह अब हमारे जीवन में है। इसलिए:

  • हमारा परमेश्वर के साथ मेल हो गया है (रोमियों 5:1)
  • हम परमेश्वर की सन्तान हैं (यूहन्ना 1:12)
  • हमें पूरी तरह क्षमा किया गया है (कुलुस्सियों 1:14)
  • हम मसीह के निकट लाए हैं (इफिसियों 2:13)
  • हमें पवित्र आत्मा की छाप दी गई है (इफिलियों 1:13)
  • हम और अधिक अन्धकार में नही रह रहे हैं (इफिसियों 5:8)
  • हम उसके राज्य के सदस्य बन गए हैं (कुलुस्सियों 1:13, 14)
  • हमें परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया गया है (1 यूहन्ना 4:9, 10; यूहन्ना 15:9)
  • हमें अनन्त जीवन दिया गया है (यूहन्ना 3:16)
  • हम परमेश्वर के प्रेम की सुरक्षा में हैं (रोमियों 8:38, 39)
  • हम परमेश्वर के अनुग्रह से बचाए गए हैं (इफिसियों 2:8, 9)
  • मसीह हमारे हृदयों में वास करता है (इफिसियों 3:17)
  • हम परमेश्वर के द्वारा चुने गए हैं (इफिसियों 1:4,5)
  • हम मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर गए हैं (यूहन्ना 5:24)
  • हम मसीह में जीवित हैं (इफिसियों 2:15)
  • हम परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी हैं (2 कुरिन्थियों 5:21)
  • हमें देखभाल करने वाले चरवाहे की अगुवाई मिली है (यूहन्ना 10:27)

यीशु ने कहा है, "....जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूँगा" (यूहन्ना 6:37)। वह इसे और अधिक आगे वर्णन करता है, "मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूँ। वे कभी नष्ट न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। मेरा पिता, जिसने उन्हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है और कोई उन्हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता। मैं और पिता एक हैं (यूहन्ना 10:28-30)। वह हमें सुरक्षित रखता है।

इसके अतिरिक्त हमें "इस बात का भरोसा है कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा" (फिलिप्पियों 1:6)।

यीशु ने एक ही बार में हमारे पापों के लिए जुर्माने को अदा कर दिया है और जब हम उसे इसके लिए धन्यवाद, उसे हमारे जीवनों में ग्रहण करते हुए, अपने जीवनों को उसके लिए देने की इच्छा से देते हैं, तो वह हमें स्वीकार करते हुए और हमें अपनी सन्तान बनाते हुए, हमें पूर्ण क्षमा देता है।

यह सम्बन्ध सुरक्षित है, इससे नहीं कि हमने क्या किया है, अपितु यह हमारे बदले में यीशु की मृत्यु के कारण और क्योंकि यह परमेश्वर का चरित्र है। यीशु ने परमेश्वर के लिए हमारे सम्बन्ध को, पाप के जुर्माने को निरन्तर करते हुए खरीद लिया है जो हमारे और परमेश्वर के मध्य खड़ा हुआ था। और इस तरह से हमें क्षमा कर दिया गया, उसकी सन्तान बन गए हैं, उसके हम में वास करते हुए, उसकी दृष्टि में धर्मी ठहराए जाने की घोषणा की गई है, क्योंकि यीशु हमारे पापों को ढक लेता है। दुर्भाग्य से, हम अभी भी पाप करेंगे। हम अभी भी परमेश्वर के मार्गों की अपेक्षा उन बातों को अपने मार्गों में करने के चुनाव को पाएंगे। परन्तु यह मसीह के साथ हमारे सम्बन्ध की सुरक्षा को परिवर्तित नहीं करता है। हम इस सम्बन्ध में सुरक्षित खड़े हैं, क्योंकि परमेश्वर इसके बारे में जो कहता है वह यह है "अत: जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें (रोमियों 5:1)।

उद्धार यीशु के माध्यम परमेश्वर का शुद्ध उपहार है, जिसे एक बार विश्वास के द्वार प्राप्त किया जाता है। इस क्षण हमने परमेश्वर के साथ ऐसे सम्बन्ध को आरम्भ किया है जो अनन्तकाल तक बना रहेगा। मसीह के साथ हमारा सम्बन्ध व्यक्तिगत् पवित्रता, या विश्वास के स्तरों, या बलिदानों, या भले कर्मों या धार्मिक कार्यों के ऊपर आधारित नहीं है। परमेश्वर की मंशा यह नहीं है कि हम हमारे कार्यों के ऊपर अपने ध्यान को केन्द्रित कर लें। वह हमारे ध्यान को यीशु के ऊपर केन्द्रित किए जाने की इच्छा रखता है।

इस संसार के अन्य सम्बन्धों के विपरीत, परमेश्वर के साथ हमारा सम्बन्ध सुरक्षित है क्योंकि वह पहले हमें इस सम्बन्ध में ले कर आया है, और वह हमें अनन्तकाल के लिए इसमें बने रहने के लिए विश्वासयोग्य है। 1 कुरिन्थियों 1:9 कहता है, "परमेश्वर सच्चा है, जिसने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।"