क्या मसीह विश्वासियों के लिए यह कहना अनुचित्त है कि परमेश्वर तक पहुँचने के लिए यीशु ही एक मार्ग है?

परमेश्वर इस बात पर पूर्ण रीति से स्पष्ट है कि हम कैसे उसके सामने ग्रहणयोग्य हैं। बाइबल कहती है, “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।” (यूहन्ना 3:16)। और कई बार यीशु ने हमें अनन्त जीवन देने के लिए उसके आने के प्रयोजन के बारे में बातें की है। उसने लगभग सीधे ही कह दिया:“...क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है कि जो कोई पुत्र को देखे और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 6:40)।

यदि हम परमेश्वर के पास किसी धार्मिक व्यक्ति (अर्थात् बुद्धा, अल्लाह, मोहम्मद, हिन्दू देवी देवता इत्यादि), या किसी के धार्मिक प्रयास के द्वारा आ सकते...तो यीशु को इस पृथ्वी पर आने की और न ही हमारे पापों के लिए क्रूस पर मरने की कोई आवश्यकता थी। परन्तु यह परमेश्वर की योजना थी – स्वयं परमेश्वर ने हमारे पापों के बदले में दण्ड को अदा कर दिया, ताकि पूर्ण क्षमा हमें दी जा सके। “क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है” (रोमियों 6:23)।

यीशु में विश्वास करने का अर्थ जीवन है; न विश्वास करने का अर्थ व्यक्तिगत् पाप के दोष में और परमेश्वर के न्याय के अधीन बने रहना है। परमेश्वर किसी को भी क्षमा प्रदान करता है जो उसके पास आते हैं।

यदि आप इस विषय पर और अधिक जानकारी चाहते हैं कि कैसे मसीहियत की तुलना अन्य धर्मों, जैसे इस्लाम, बौद्ध, हिन्दू से की जाती है, तो कृपया इस लेख को देखें: ईश्वर के साथ जुड़ना

और यदि आप एक बहुत ही सहायतापूर्ण लेख को देखना चाहते हैं कि कैसे हम यह जान सकते हैं की यीशु परमेश्वर है, तो कृपया इस लेख अंधविश्वास से परे को देखें।